
एनसीईआरटी की किताब से हटेगा न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का पाठ

सुप्रीम कोर्ट सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा पाठ नहीं पढ़ेंगे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद हरकत में आई केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को न सिर्फ संबंधित अध्याय को किताब से हटाने, बल्कि बिक्री के लिए उपलब्ध कराई किताबों को तत्काल वापस लेने का निर्देश दिया है। सूत्रों ने बताया कि इस निर्देश पर अमल शुरू हो गया है। शिक्षा मंत्रालय ने मामले की जांच के बाद जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी संकेत दिया। इस बीच, एनसीईआरटी ने वेबसाइट से भी इस पुस्तक को हटा लिया है। इससे पहले, नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित पाठ शामिल करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्वतःसंज्ञान कार्यवाही शुरू की। विषय को इस तरह पढ़ाया जा रहा है, जैसे किसी अन्य संस्था में भ्रष्टाचार मौजूद ही नहीं है। उन्होंने कहा, नौकरशाही व राजनीति और अन्य को छोड़ दिया गया है। इन क्षेत्रों के बारे में एक शब्द भी नहीं है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, मुझे इसकी पूरी जानकारी है। यह निश्चित रूप से पूरी संस्था से संबंधित है।>>>Visit: Samadhanvan
भ्रष्टाचार व लंबित मुकदमों के बोझ की जानकारी

बार और बेंच दोनों से। मुझे बहुत सारे फोन व संदेश आ रहे हैं। मैं इस मामले का स्वतः संज्ञान ले रहा हूं। मैं किसी को भी, चाहे वह कितने भी ऊंचे पद पर हो, संस्था को बदनाम नहीं करने दूंगा। सीजेआई ने कहा, यह एक सोची-समझी और गहरी जड़ें जमा चुकी साजिश है। अभी इससे ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे। संस्था के प्रमुख के रूप में मैं इससे अवगत हूं और कदम उठा रहा हूं। मामले में बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी। बता दें कि 8वीं के सामाजिक विज्ञान की किताब में हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका शीर्षक अध्याय में संस्था में भ्रष्टाचार व लंबित मुकदमों के बोझ की जानकारी दी गई थी।मंत्रालय के कारण केंद्र सरकार को असहज होना पड़ा है। इससे पहले, उच्च शिक्षण संस्थाओं में भेदभाव संबंधी यूजीसी नियमों पर विवाद के उग्र रूप लेने से सरकार बैकफुट पर आई। अब सरकार किताब में न्यायपालिका को निशाना बनाए जाने से उपजे विवाद की तपिश झेल रही है।



