
एक मंत्री शपथ समारोह में दिखा हिंदू-बौद्ध संस्कृति का संगम

Nepal के राजनीतिक इतिहास में शुक्रवार को एक अभूतपूर्व और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला। रामनवमी के पर, रैपर से राजनेता बने 35 वर्षीय बालेंद्र शाह बालेन ने नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 36 वर्षीय प्रधान मंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में Nepal की नई सरकार में एक बड़ा पीढ़ीगत बदलाव देखने को मिला है, जहां ज्यादात्बर मंत्री 30-40 वर्ष की आयु के हैं और 50 वर्ष से अधिक उम्र के केवल एक मंत्री (वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले) हैं। यह संकेत है कि अब पूरी तरह एक युवा और तकनीक से निपुण नेतृत्व नेपाल को चलाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह केवल एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि हिंदू और बौद्ध धार्मिक परंपराओं के अद्भुत संगम का गवाह बना। दोपहर ठीक 12:34 बजे के शुभ मुहूर्त पर, जब बालेन ने पद और गोपनीयता की शपथ ली, तो पूरा परिसर वैदिक ऋचाओं और शंखों की ध्वनि से गूंज उठा। बालेन कार्यक्रम में अपने परिवार के साथ पहुंचे। बालेन Nepal के लोकतांत्रिक इतिहास में शीर्ष पद संभालने वाले सबसे युवा नेता बन गए हैं। साथ ही, वे कार्यपालिका की कमान संभालने वाले मधेश क्षेत्र के पहले व्यक्ति भी हैं। उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 5 मार्च को हुए चुनावों में सुनामी लाते हुए प्रतिनिधि सभा की 275 में से 182 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत ने नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल जैसे पारंपरिक दलों का लगभग सफाया कर दिया है। शपथ ग्रहण में दिखा सनातन और बौद्ध संस्कृति का संगम शपथ ग्रहण के दौरान सदियों पुरानी परंपराओं को जीवंत किया गया। समारोह की शुरुआत सात ब्राह्मणों के शंखनाद से हुई। फिर 108 हिंदू बटुकों ने स्वस्ति वाचन और वैदिक मंत्रोच्चारण किया। 107 बौद्ध लामाओं ने मंगल वाचन और बौद्ध धर्मग्रंथों का पाठ किया।>>>Visit: Samadhanvan
ओली समेत कई अधिकारियों पर लटकी तलवार

काठमांडो। Nepal में प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में जेन-जी आंदोलन की जांच के लिए गठित कार्की आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का बड़ा निर्णय लिया है। सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल के अनुसार, 8 और 9 सितंबर के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मौतों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक और तत्कालीन आईजीपी चंद्रकुवेर खापुड के खिलाफ गंभीर लापरवाही के आरोप में जांच की सिफारिश की है। इनके विरुद्ध मुलुकी अपराध संहिता की धारा 181 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें 10 वर्ष तक की कैद का प्रावधान है सबसे युवा के साथ ही मधेश क्षेत्र के पहले प्रधानमंत्री
शपथग्रहण समारोह के दौरान परिवार के साथ बेटी को गोद में लिए बालेंद्र।



