
मकान मालिक से संबंध बताना होगा अनिवार्य

income tax केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को आयकर अधिनियम, 2025 के लिए नियमों को अधिसूचित कर दिया। इसमें वेतनभोगियों के लिए मकान किराया भत्ते पर बढ़े हुए कर लाभ का प्रावधान है, लेकिन मकान मालिक-किरायेदार के संबंधों का खुलासा करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह एक अप्रैल से प्रभावी होगा। संसदने 12 अगस्त, 2025 को छह दशक पुराने income tax अधिनियम, 1961 को बदलने के लिए एक नया आयकर विधेयक पारित किया था। यह कोई नई कर दर लागू नहीं करता है, बल्कि केवल भाषा को सरल बनाता है। जटिल income tax कानूनों को समझने के लिए ऐसा करना आवश्यक था। इसमें अनावश्यक प्रावधानों और पुरानी भाषा को हटा दिया है और income tax अधिनियम, 1961 की 819 धाराओं को घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी है। income tax नियम वेतनभोगी करदाताओं पर लागू होने वाले मकान किराया भत्ता (एचआरए) छूट के लिए प्रस्तावित ढांचे को बरकरार रखते हैं। नए नियमों के तहत आठ शहर – मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, वेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और देगलुरु – वेतन के 50 प्रतिशत की उच्च छूट सीमा के लिए पात्र होगे, जबकि अन्य सभी स्थान 40 प्रतिशत पर बने रहेंगे।>>>Visit: Samadhanvan
एकल कर वर्ष की अवधारणा लागू

खुलासा प्रणाली को और सरल बनाया गया भी नए नियमों में पूंजीगत लाभ, शेयर बाजार के लेनदेन और अनिवासी कराधान के लिए सख्त नियम बनाए गए है, जबकि अन्य खुलासा प्रणाली को सरल बनाया गया है। अधिसूचना में 150 से अधिक आधिकारिक फॉर्म पेश किए गए हैं। इसमें पैन के दोहरीकरण और प्रतिकूल ऑडिट टिप्पणी से पैदा होने वाली कर देनदारी की जांच के लिए लेखा परीक्षकों को अधिक जिम्मेदारी दी गई है। नए कानून के तहत ‘कर वर्ष’ की नई अवधारणा लाई जा रही है। यह पहले इस्तेमाल होने वाले पूर्व वर्ष और ‘कर निर्धारण वर्ष’ की व्यवस्था की जगह लेगा। इस बदलाव का मकसद कर प्रणाली को आसान बनाना है, ताकि आय कमाने की अवधि और उस पर कर लगाने की अवधि को एक ही शब्द में समझाया जा सके। कुल मिलाकर नए कानून में वित्तीय वर्ष और कर निर्धारण वर्ष की जगह एक ही कर वर्ष लागू



