
एसआईआर वैध चुनाव आयोग का अधिकार लोकतंत्र की मजबूती

Supreme कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सांविधानिक और वैध है। यह निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में है। शीर्ष अदालत ने ऐतिहासिक फैसले में कहा, एसआईआर प्रक्रिया संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम एवं निर्वाचन नियमों के अनुरूप है, इसका मकसद लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। एसआईआर की प्रक्रिया निष्पक्ष जनादेश में प्राण डालती है। Supreme कोर्ट ने यह भी कहा, चुनाव आयोग को मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने के दौरान किसी व्यक्ति की नागरिकता से जुड़े सवालों की सीमित जांच करने का अधिकार है। हालांकि, आयोग का निर्णय नागरिकता का अंतिम निर्धारण नहीं माना जाएगा। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्क नागरिकता आयोग का निर्णय सिर्फ चुनाव तक मतदाताओं की नागरिकता जांचने की शक्ति पर कोर्ट ने कहा, आयोग सीमित मकसद से नागरिकता की जांच कर सकता है। दस्तावेज पर संदेह हो या संतोषजनक न लगें, तो नाम हटाने या शामिल न करने का निर्णय कर सकता है। हालांकि इससे निष्कर्ष नहीं निकाल सकते कि व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है। नागरिकता का अंतिम निर्णय सिर्फ नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत सक्षम प्राधिकारी ही करेगा। आयोग का निर्णय चुनावी मामलों तक सीमित रहेगा। यदि व्यक्ति का नाम नागरिकता संबंधी संदेह पर हटाते हैं, तो उसे सक्षम प्राधिकार को भेजा जाएगा। वही अंतिम फैसला करेगा।>>>Visit: Samadhanvan
चुनाव आयोग के पास अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) के तहत

Supreme स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव, मतदाता सूचियों की सत्यनिष्ठा, सटीकता व विश्वसनीयता पर निर्भर करते हैं। बिहार एसआईआर को वैध सांविधानिक मकसद का समर्थन था। एसआईआर फ्रेमवर्क में नोटिस, सुनवाई, आपत्तियों, तर्कसंगत आदेशों और अपील के पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। मतदाता सूची में पात्रता सिद्ध करने के लिए दस्तावेज पेश करने का ढांचा मनमाना नहीं है। न एसआईआर असंगत या अनुचित हनागरिकता पर संदेह के मामले सक्षम प्राधिकारी को भेजे जाएं Supreme कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिए कि बिहार में जिनके नाम नागरिकता पर संदेह के आधार पर हटाए हैं, उन्हें चार सप्ताह में सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाए। कोर्ट ने कहा, अगले विधानसभा या निकाय चुनाव से पहले इन मामलों का निपटारा हो जाए। यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है, तो नाम दोबारा जोड़ा जाएगा।



