
केंद्र से मांगा जवाब कहा-1986 का फैसला दंडात्मक कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1986 के एक फैसले का हवाला देते हुए मौखिक रूप से कहा कि धार्मिक कारणों से या अंतरात्मा की आवाज पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम न गाने वाले व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इस बारे में फिलहाल कोई आदेश या निर्देश नहीं जारी किया। कोर्ट ने वंदे मातरम से जुड़े कानूनी संशोधन, जिसके तहत बंदे मातरम न गाने का दंडात्मक बनाया गया है और सभी छह पैरे गाना अनिवार्य किया गया है, को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जबाबी हलफनामा दायर करने के लिए कहा। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने वार्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्ण की याचिका सुनवाई के दौरान कहा, राष्ट्रीय गीत्र क्या है. य तय करना अदालत का काम नहीं में तय सिद्धांत ही संशोधित कानून पर भी लागू होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने उन बच्चों को सुरक्षा दी थी जिन्होंने सम्मानपूर्वक लेकिन

अंतरात्मा की आवाज पर राष्ट्रगान गाने से इन्कार कर दिया था। पीठ ने कहा-राष्ट्रीय गीत दो पद है या चार पद, राज्य तय करें जस्टिस बागची ने कहा, राष्ट्रीय गीत पर कोई विवाद नहीं है। यह लोकतांत्रिक राज्य को तय करना है कि राष्ट्रीय गीत क्या है-दो पद या चार पद। पर जिसे लगता है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 (धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार) के तहत उसके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, या जो A अंतरात्मा की आवाज पर मना करता है, हमें लगता है, उसे दंड का सामना नहीं करना चाहिए।
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