संविधान पीठ तय करेगी. शिवसेना जजों की बेंच 8 सवालों से फैसला करेगी

महाराष्ट्र की सियायत में एकनाथ शिंदे ने सीएम

संविधान पीठ तय करेगी. शिवसेना जजों की बेंच 8 सवालों से फैसला करेगी

संविधान पीठ को शिवसेना पर अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को फिर सुनवाई हुई। CJI एनवी रमना, जस्टिस कृष्णा मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली ने शिंदे की शिवसेना बनाम उद्धव की शिवसेना केस को संविधान पीठ को भेज दिया है। तीन जजों की बेंच ने 8 सवाल तैयार किए हैं, जिसके आधार पर संविधान फैसला करेगी कि शिवसेना किसकी है।    हाईकोर्ट भर्ती में 2756 पदों पर निकली वैकेंसी 22 सितम्बर तक कर सकेंगे अप्लाई

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह पार्टी सिंबल विवाद पर गुरुवार तक फैसला ना ले। पांच जजों की बेंच इस मामले पर 25 अगस्त को सुनवाई करेगी।मुख्यमंत्री एकनाथ श‍िंदे ने कहा था क‍ि हमारे ऊपर अयोग्‍यता का आरोप गलत लगाया गया है। हम अभी भी श‍िवसैनिक हैं। उधर, सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा था

शिंदे गुट में जाने वाले विधायक संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से तभी बच सकते हैं, अगर वो अलग हुए गुट का किसी अन्य पार्टी में विलय कर देते हैं। उन्होंने कहा था कि उनके बचाव का कोई दूसरा रास्ता नहीं है।महाराष्ट्र की सियायत में एकनाथ शिंदे ने सीएम की कुर्सी पाकर खुद को राजनीति का कुशल खिलाड़ी साबित कर दिया.

शिवसेना का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने अब सेना बनाम शिवसेना केस संविधान पीठ को भेज दिया है. अब सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करेगा. संविधान पीठ चुनाव आयोग के सामने चुनाव चिन्ह मामले की सुनवाई का मामला सुनेगी. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को गुरुवार तक कोई एक्शन ना लेने के आदेश दिए

विधायकों की आयोग्यता के मसले पर भी फैसला

संविधान पीठ तय करेगी. शिवसेना जजों की बेंच 8 सवालों से फैसला करेगी

सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. अब इसी मसले को लेकर दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही है. वहीं विधायकों की आयोग्यता के मसले पर भी फैसला होना है. आपको बता दें कि शिव सेना ने नेता एकनाथ शिंदे ने बागी तेवर अपनाते हुए पार्टी के कई विधायकों को अपने साथ जोड़ बीजेपी के सहयोग से सीएम की कुर्सी कब्जा ली थी.

चुनाव आयोग उद्धव ठाकरे गुट को सुप्रीम कोर्ट में मामले के लंबित होने के मद्देनजर अपना जवाब दाखिल करने के लिए उचित स्थगन दे सकता है। भारत के चुनाव आयोग ने यह स्टैंड लिया कि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की कार्यवाही एक अलग क्षेत्र में संचालित होती है और आधिकारिक मान्यता के लिए प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे को तय करने के लिए आयोग की शक्ति को प्रभावित नहीं करती है।

भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ अयोग्यता कार्यवाही, अध्यक्ष के चुनाव, पार्टी व्हिप की मान्यता के संबंध में शिवसेना पार्टी के एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुटों से संबंधित याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

लोकतंत्र पर बहुमत के सदस्यों को पार्टी

संविधान पीठ तय करेगी. शिवसेना जजों की बेंच 8 सवालों से फैसला करेगी

महाराष्ट्र विधानसभा में शिंदे सरकार के लिए फ्लोर टेस्ट और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट द्वारा चुनाव चिह्न ( आरक्षण        और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत ईसीआई द्वारा ‘असली शिवसेना’ के रूप में मान्यता की मांग करते हुए कार्यवाही शुरू की गई। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था

अदालत को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या पार्टी के भीतर लोकतंत्र पर अंकुश लगाने और बहुमत के सदस्यों को पार्टी के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग करने से रोकने के लिए 10 वीं अनुसूची का “दुरुपयोग” किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की तीन-जजों की पीठ ने 20 जुलाई को कहा था        Delhi Police Constable Driver Bharti 2022 | दिल्ली पुलिस कांस्टेबल (ड्राइवर) भर्ती 1411 पदों पे अधिसूचना

शिवसेना दरार के संबंध में दायर याचिकाओं में उत्पन्न होने वाले मुद्दों को एक बड़ी पीठ के पास भेजा जा सकता है। सीजेआई एनवी रमना ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी की कि महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे उन मामलों में उत्पन्न होते हैं जिनके लिए एक बड़ी पीठ द्वारा निर्णय की आवश्यकता हो सकती है। 27 जून को, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की खंडपीठ ने बागी विधायकों के लिए डिप्टी स्पीकर की अयोग्यता नोटिस पर लिखित जवाब दाखिल करने का समय 12 जुलाई तक बढ़ा दिया था।