अस्पताल में वेंटिलेटर फटा, तीन शिशुओं की मौत, नर्सों ने 36 नवजातों को बचाया

अमरावती में आग से पूरा वार्ड जल गया एक से 10 दिन के मासूम दुनिया न देख सके
अमरावती में आग से पूरा वार्ड जल गया एक से 10 दिन के मासूम दुनिया न देख सके

अमरावती जिला महिला अस्पताल में दिल दहला देने वाली घटना में सोमवार तड़के 3.15 बजे नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में वेंटिलेटर फट गया। इससे भीषण आग लग गई, जिससे तीन शिशुओं की दर्दनाक मौत हो गई। महज एक से लेकर 10 दिन तक के ये शिशु दुनिया देखने से पहले ही चल बसे। हादसे के बाद साहस दिखाते हुए नर्सों व अस्पताल स्टाफ ने 36 बच्चों को बचा लिया। अमरावती के डीएम आशीष येरेकर ने बताया, तीसरी मंजिल पर स्थित एनआईसीयू में वेंटिलेटर से चिंगारी निकली, जिसके बाद तेजी से आग फैली। पूरा कक्ष जहरीले धुएं से भर गया। इस वार्ड में नौ शिशु थे, जिनमें छह को बचा लिया गया। हादसे के बक्त तीन बाड़ों में 39 नवजीत थे। सुरक्षित बच्चों को अन्य अस्पतालों में भर्ती किया गया है। इनमें एक गंभीर है। डीएम और परिजनों ने बताया क्यूटी पर तैनात चिकित्सकों, नसों और अन्य कर्मचारियों ने आग और धुएं के बीच शिशुओं को बाहर निकाला। हालांकि तब तक तीन नवजातों की मौत हो चुकी थी। एनआईसीयू के जले उपकरण और दीवारों पर कालिख खौफनाक हादसे की कहानी बयां कर रहे।

महाराष्ट्र सरकार ने जांच के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बनाई

अमरावती में आग से पूरा वार्ड जल गया एक से 10 दिन के मासूम दुनिया न देख सके
अमरावती में आग से पूरा वार्ड जल गया एक से 10 दिन के मासूम दुनिया न देख सके

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आग लगने के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने जांच के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बनाई है। वहीं, बच्चों के परिवारवाले अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। अचलपुर के योगेश ने बताया, मेरी पत्नी व 8 दिन का बच्चा अस्पताल में भर्ती थे। मैं बाहर सो रहा था। आग व धु से अफरा-तफरी मच गई। मैं पहली मंजिल पर पहुंचा और बच्चे को लेकर भागा। मैंने देखा, कई बच्चों के शरीर पर काली राख जमी हुई थी। स्टाफ नर्स, गार्ड और अन्य परिजन बच्चों को बाहर निकालकर भाग रहे थे। वर्धा जिले के पुलगांव की पूजा बोरगे एक दिन पहले मां बनी थीं। समय से पहले और वजन कम होने से शिशु को अस्पताल लाया गया था। पिता स्वप्निल बेहद खुश थे, पर हादसे में उनके बच्चे की भी मौत हो गई। उनके अलावा गायत्री चोपड़े के बेटे व किरण बेठेकर की बेटी ने भी दम तोड़ दिया। लापरवाही. परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी थे। फायर अलार्म ने काम नहीं किया व स्वचालित वॉटर स्प्रे सिस्टम भी सक्रिय नहीं हुआ।

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