त्योहारों के दौरान सोने की मांग छह साल में सबसे कम

सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों ने इस साल त्योहारी और शादी की खरीद पर असर डाला है। जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की सोने की मांग सालाना आधार पर 29 फीसदी घटकर 162.5 टन रह गई। यह छह साल का निचला स्तर है। इसी के साथ पूरे 2026 में भारत की सोने की मांग करीब 650 टन रहने का अनुमान जताया गया है। यह भी कोविड के बाद सबसे निचला स्तर होगा। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की जुलाई-सितंबर तिमाही में देश में सोने की कुल मांग 229.8 टन रही थी। हालांकि, मांग की मात्रा घटने के बावजूद मूल्य के लिहाज से खरीद तीन फीसदी बढ़कर 2,41,900 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 2,35,090 करोड़ रुपये थी। वहीं, सुरक्षित निवेश के तौर पर खरीदे जाने वाले सोने की मांग 40 प्रतिशत तक गिरी है। समीक्षाधीन तिमाही में सोने की छड़ों और सिक्कों की कुल मांग 40 प्रतिशत घटकर 55 टन रह गई, जो पिछले साल ग्राहकों की खरीदारी जारी : रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोने की ऊंची कीमतों ने उपभोक्ताओं के खरीदारी के व्यवहार को प्रभावित किया। मांग घटने के बावजूद खरीदारी मूल्य में बढ़ोतरी हुई है। इससे पठा चलता है कि उपभोक्ता सोने को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए हैं।
सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों ने इस साल त्योहारी और शादी के सीजन पर असर डाला

जुलाई-सितंबर में भारत में आभूषणों की मांग 2025 की समान तिमाही के 125 टन से 20 फीसदी घटकर 99.9 टन रह गई। हालांकि, कीमत बढ़ने के कारण मूल्य के लिहाज से आभूषणों की मांग 16 फीसदी बढ़कर 1,48,700 करोड़ रुपये हो गई। पहले नौ महीनों में आभूषणों की मांग 18% घटकर 241.1 टन रही, जबकि इस पर खर्च 29% बढ़कर 3,61,830 करोड़ हो गया। की इसी तिमाही में 91.6 टन थी। वहीं,ग्रामीण क्षेत्रों में भी असर भारत में सोने की कुल खपत का आधे से ज्यादा हिस्सा ग्रामीण इलाकों से आता है। लेकिन इस साल कमजोर मानसून ने ग्रामीण मांग पर असर डाला और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च के कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक, कम आमदनी ग्रामीण परिवारों के लिए सोने की खरीदारी मुश्किल हो गई है। इसका असर ज्वेलरी की मांग पर साफ दिखाई दे रहा है। सोने की मांग में इस तेज गिरावट की प्रमुख वजह आयात शुल्क में बढ़ोतरी. कीमतों में तेज उछाल और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से खरीदारी पर अंकुश लगाने की अपील रही। ऊंची कीमतों और बढ़ते घरेलू खर्च ने लोगों की सोना खरीदने की क्षमता को प्रभावित किया है।
