कड़वे अनुभवों से कलाकार भी कड़वा हो जाता है’

मुंबई में कदम रखने के बाद गायक नए कलाकार की तरह उन्हें भी ऐसे लोगों के बीच से रास्ता बनाना पड़ा, जो खुद प्रोफेशनल नहीं थे और संघर्ष करके इंडस्ट्री तक पहुंचे। आते ही दलाल घेर लेते हैं जब हम दिल्ली से आए थे, हमारे साथ भी ऐसे ही एलिमेंट थे और वो खुद भी बेचारे प्रोफेशनल नहीं थे। वह भी इधर-उधर की पहचान के सहारे जुड़े हुए थे। आपको उन चीजों से गुजरना ही पड़ता है।’ नए कलाकारों के सफर की बात करते हुए कैलाश कहते हैं, ‘नया इन्सान आता है, एल्बम बनाने के लिए, म्यूजिक में कॅरिअर बनाने के लिए। उसको रास्ता, गाइडेंस मिलती नहीं है। उलटे यहां दलाल लोग घेर लेते हैं। कोई छोटा एक्टर है, कोई छोटा कॉमेडियन है। कोई छोटा कंपोजर है। एल्बम बनाने के नाम पर ठगने के लिए लोग तैयार हैं। बाहर से आए नए लोग इस झांसे में आ जाते हैं।’कलकार का बालक मन वह आगे कहते हैं, ‘कलाकार बड़ा संवेदनशील होता है, कलाकार बालक मन में होता है। अगर उसे पास कड़वे अनुभव होते हैं तो वह बड़ा आदमी बनने के बाद भी वह इन्सान कड़वा ही रहता है। ऐसे में कड़वे अनुभव न हों। कलाकार, कलाकार ही रहे। निर्मल रहे, पवित्र आत्मा ही बन के कार्य करे, तो उसके लिए कला शुरू से आखिर तक उनकी मदद करेगी।’
कैलाश खेर का सफर इतना आसान नहीं रहा

एग्रीमेंट में फंसते हैं कलाकार वह कहते हैं, ‘क्या पता उसका गाना हिट हो जाए। गाना हिट होने के बाद ध्यान से देखो कि लोग किस तरह के एग्रीमेंट बनाकर रखते हैं। जो कंपनियां पहले से हैं, वह एग्रीमेंट बना के रखती हैं कि अगर इसका गाना चल गया तो शो होगा। जो भी शो करेगा, उसका इतना परसेंट हमारा, इतना उसका। इस तरह 10-10 साल के एग्रीमेंट में लोग फंस जाते हैं। दरअसल, लोगों का कॅरिअर ज्यादा से ज्यादा 30 साल का ही होता है, जो ठीक होता है। उसमें से 10 साल कोई और चुरा लेता है। जीवन का बड़ा हिस्सा चला जाता है।’ नए कलाकारों को सीधे जुड़ने का रास्ता देने की बात करते हुए कैलाश एडवरटाइजिंग का उदाहरण देते हैं। वह कहते हैं, ‘जिसको म्यूजिक में अपना कॅरिअर बनाना है, वह सीधे हमसे जुड़ सकता है। एल्बम बनाना है तो राइटर, कंपोजर और प्रोग्रामर देंगे। गाना रिकॉर्ड कराएंगे। स्टूडियो और प्रोडक्शन हाउस अपना है। वीडियो बनाएंगे, रिलीज भी कराएंगे। कैलाशा रिकॉर्ड्स अपनी है। तो एक ही जगह पर उसको सारा सॉल्यूशन मिल गया और कॅरिअर की ग्रोथ का रास्ता बन जाएगा।’
