दिल्ली में बसों की हड़ताल, ऑटो का किराया चार गुना

दिल्ली की सड़कों पर बुधवार को बसें तो दिखीं, लेकिन यात्रियों का सफर आसान नहीं हुआ। डीटीसी बस चालकों की हड़ताल के बीच कई बसें डिपो से निकलीं, मगर यात्रियों को बैठाए बिना आगे बढ़ गईं या कुछ दूरी पर खड़ी हो गईं। बस स्टैंड पर लोग घंटों इंतजार करते रहे डिजिटल बोर्ड पर ‘ब्रेकडाउन’, ‘नो सर्विस’ और ‘ट्रायल’ जैसे संदेशों ने रही-सही तस्वीर भी धुंधली कर दी। नतीजा यह रहा कि दफ्तर, स्कूल और रोजमर्रा के काम पर जाने वालों को ऑटो और दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। सामान्य सफर की तुलना में कई यात्रियों का खर्च कई गुना बढ़ गया। स्टैंड पर बस का इंतजार करते यात्री और बस में चढ़ने की जद्दोजहद।
862 रुपये दिहाड़ी पर सवाल, चालकों ने गिनाई परेशानियां

हड़ताल कर रहे चालकों ने कम वेतन, लंबी ड्यूटी और सुविधाओं की कमी को प्रमुख मुद्दा बत्ताया। नारायणा डिपो के चालक अनिल कुमार ने कहा कि वर्षों से बस चलाने के बावजूद सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। सुभाष प्लेस के चालक संदीप ने सुरक्षा, मेडिकल और पीएफ सुविधा नहीं मिलने की बात कही। आलम ने कहा कि 862 रुपये की दिहाड़ी में घर चलाना मुश्किल हैं। बस की मेंटेनेंस, चालान और टूट-फूट के नाम पर होने वाली कटौती अलग है। गुरुमुख सिंह ने महंगाई, मकान के किराये और बच्चों की पढ़ाई के बढ़ते खर्च का हवाला देते हुए कहा कि 30 दिन काम करने के बाद भी परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल है।
