
Dheeraj Singh ब्रम्हाचारी की विधवा इन्द्रेश व नाबालिग बच्चों से छीनी अरबों रुपये की ज़मीन
Dheeraj Singh ब्रह्मचारी के नाबालिग बच्चों का नाम हटा दिया
दादरी, गौतमबुद्ध नगर यू.पी, : तहसीलदार दादरी के राजस्व न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 संशोधित अधिनियम 2016 की धारा 34 के अन्तर्गत तहसीलदार के आदेश दिनांक 15/04/2017 द्वारा दिनांक 19/04/2017 को उत्तराधिकार के आधार पर सुनपुरा व खेड़ी की खातासंख्या 149 व 203 की भूमि धीरज सिंह के स्थान पर श्रीमती इन्द्रेश, नाबालिग पुत्री परमजीत सिंह कौर व अन्य नाबालिग बच्चों, पत्नी Dheeraj Singh ब्रह्मचारी के नाम दर्ज कर दी गई,

जिसे तहसीलदार दादरी ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 संशोधित अधिनियम 2016 की धारा 34 के अन्तर्गत अपनी संवैधानिक शक्तियों व क्षेत्राधिकार से परे जाकर मोहित व ओमकार आदि बनाम Dheeraj Singh वाद संख्या टी-202111270213533 में प्रतिवादी को बिना कोई नोटिस दिए एक तरफा सुनवाई करते हुए फसली वर्ष की वर्तमान खतौनी ग्राम सुनपुरा परगना व तहसील दादरी, गौतमबुद्ध नगर के आधार पर दर्ज कर दी।
राजस्व ग्राम खेड़ी की खतौनी 1430-1435 की खाता संख्या 47, 135, 187 तथा खतौनी 1430-1435 की खाता संख्या 177, 140, 393, 178, 257, 339, 59 एवं 310 में दिनांक 02/07/2021 को बिक्री पर रोक लगा दी गयी थी।
तहसीलदार दादरी को महान कहें या मूर्ख या गुनाहों का देवता कहें
इतना ही नहीं, प्रतिवादी/Dheeraj Singh ब्रह्मचारी की विधवा श्रीमती इंद्रेश का पक्ष सुने बिना ही अन्य झूठे व मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश सिविल संहिता 2006 व संशोधित अधिनियम 2016 की धारा 34 के अंतर्गत एक सुनियोजित वाद टी-202111270213522 दर्ज कर एकतरफा कार्रवाई करते हुए प्रतिवादी/ब्रह्मचारी की विधवा श्रीमती इंद्रेश पुत्री परमजीत कौर नाबालिग अर्थात ब्रह्मचारी के नाबालिग बच्चों का नाम हटा दिया गया तथा ब्रह्मचारी के भतीजों मोहित व ओमकार पुत्र शेर सिंह व माता धनेश का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश दिनांक 23/02/2024 पारित कर दिया गया। समझ में नहीं आता कि तहसीलदार दादरी को महान कहें या मूर्ख या गुनाहों का देवता कहें या न्याय का देवता।
Dheeraj Singh ब्रह्मचारी की विधइंद्रेश्रीमती श और नाबालिग बच्चों की अरबों रुपए की जमीन छीनी
जहां तक विश्वसनीय विद्वान कानूनी विशेषज्ञों की बात है तो धारा 34 के तहत मुकदमों का निपटारा नायब तहसीलदार के न्यायालय में होता है। फिर तहसीलदार को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर धारा 34 के तहत मामले को अपने न्यायालय में निपटाने की क्या जरूरत थी?
क्या यह संभव है कि वा Dheeraj Singh ब्रह्मचारी की विधइंद्रेश्रीमती श और नाबालिग बच्चों की अरबों रुपए की जमीन को ब्रह्मचारी के भतीजों और उनकी भाभी के नाम दर्ज करवाने के लिए तहसीलदार साहब ने करोड़ों रुपए की सुपारी ली हो?
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यहां तो एसडीएम भूमाफियाओं से मिलीभगत करके खूब पैसा कमाते हैं और गरीब अनपढ़ किसानों की अरबों रुपए की जमीन पर माफियाओं को कब्जा करवाकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देते हैं। ऐसे अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच आरोपी अधिकारी के अधीनस्थों द्वारा की जाती है और मामले को दबा दिया जाता है।
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वैसे भी Dheeraj Singh ब्रह्मचारी की विधवा श्रीमती इंद्रेश और उनके नाबालिग बच्चों के अधिकारों को छीनने के लिए तहसीलदार और क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक द्वारा निकट भविष्य में कोई डील होने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि Dheeraj Singh ब्रह्मचारी की विधवा उक्त आदेशों के खिलाफ पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटा रही है।
क्या वाकई इस देश में कुछ नहीं हो सकता जहां रिश्वत, सिफारिश और चापलूसी ही देश के भगवान हैं?
जय हिंद।
डॉ. वी. के. सिंह
(वरिष्ठ पत्रकार)




