देश को भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए

भारत की सफलता को पीएम नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से मुलाकात की और उनके ऐतिहासिक अंतरिक्ष अनुभव पर बातचीत की। प्रधानमंत्री ने कहा कि India की सफलता का रास्ता अंतरिक्ष लक्ष्यों को आत्मनिर्भरता के साथ पूरा करने में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए 40-50 प्रशिक्षित और तैयार अंतरिक्ष यात्रियों की एक बड़ी टीम तैयार करनी होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि India के सामने अब दो बड़ी रणनीतिक चुनौतियां भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और गगनयान मिशन है। उन्होंने शुभांशु शुक्ला की यात्रा को भारत की स्पेस महत्वाकांक्षाओं की दिशा में पहला कदम करार दिया।>>>Visit: Samadhanvani
शरीर को नए वातावरण में ढलने में चार-पांच दिन लगते हैं

मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष यात्रा के शारीरिक और मानसिक प्रभावों पर चर्चा की। शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में दिल की धड़कन धीमी हो जाती है और शरीर को नए वातावरण में ढलने में चार-पांच दिन लगते हैं। वहीं, पृथ्वी पर लौटने के बाद शुरुआती समय में चलना मुश्किल हो जाता है। शुभांशु शुक्ला ने बताया अंतरिक्ष में शरीर पर क्या प्रभाव हुए अंतरिक्ष के अनुभव शुभांशु शुक्ला ने पीएम मोदी के साथ साझा किए।



