
जीएसटी 2.0 अमेरिकी निर्यात मांग में कमी की घरेलू मांग के जरिये भरपाई

जीएसटी सुनारों से भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ के प्रतिकूल प्रभावों की कुछ हद तक भरपाई होने की उम्मीद है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी की वृद्धि दर पर टैरिफ का शुद्ध प्रभाव 0.2-0.3 फीसदी रहेगा। अच्छी बात यह है कि जीएसटी 2.0 अमेरिकी निर्यात मांग में कमी की घरेलू मांग के जरिये भरपाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा नागेश्वर ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा, जीएसटी सुधार से केवल घरेलू खपत ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि घरेलू मांग पैदा कर दूसरे और तीसरे दौर के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। इस प्रकार, पूंजी निर्माण के रास्ते में आने वाली बाधा दूर होगी। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में अमेरिका को वस्तु निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में आधा हो चुका है। इस वित्त वर्ष में प्रभाव सीमित हो सकता है। सीईए ने कहा, टैरिफ का असर लंबे समय तक नहीं होगा। यह अल्पकालिक होगा। अगर यह हमारी अपेक्षा से अधिक समय तक जारी रहता है, खासकर 25 फीसदी का दंडात्मक टैरिफ तो दूसरे एवं तीसरे दौर के प्रभाव और भी स्पष्ट हो जाएंगे>>>Visit: Samadhanvani
फिच ने वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.9 फीसदी किया

फिच रेटिंग्स ने जून तिमाही की मजबूत वृद्धि और घरेलू खपत आधारित मांग के आधार पर चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया है। पहले 6.5 फीसदी था। यह पहली वैश्विक रेटिंग एजेंसी है जिसने व्यापार और टैरिफ अनिश्चितताओं के कारण इस साल की शुरुआत में GDP विभिन्न एजेंसियों के वृद्धि दर अनुमान घटाने के बाद भी अनुमान बढ़ा दिया है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य (जीईओ) में फिच ने कहा, चालू वित्त वर्ष की मार्च और जून तिमाहियों के बीच आर्थिक गतिविधियों की गति में तेजी से वृद्धि हुई है।



