
कमिटी भी बनाई जा रही, यूजी और पीजी की 18 हजार से ज्यादा सीटें बढ़ी

एनएमसी के मेडिकल कॉलेजों में भी PhD शुरू करने की तैयारी, बोर्ड की मंजूरी रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए PhD प्रोग्राम शुरू करने का फैसला किया है। अभी देश में मुख्य रूप से AIIMS, JIPMER (पुडुचेरी), (चंडीगढ़) जैसे ‘राष्ट्रीय महत्व के मेडिकल संस्थानों’ (Institute of National Importance) में पीएचडी प्रोग्राम ऑफर किए जाते है, वहीं अब एनएमसी से मान्यता प्राप्त संस्थानों में भी क्लिनिकल रिसर्च में पीएचडी शुरू की जाएगी। एनएमसी बोर्ड ने इसकी मंजूरी दे दी है और कमिटी बनाई जा रही है।एनएमसी के चेयरमैन डॉ. अभिजात सेठ ने एनबीटी को बताया कि MBBS और मेडिकल पीजी कोर्सेज में क्लिनिकल रिसर्च को इंटीग्रेट किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा क्लिनिकल ट्रायल किए जा सकें। क्लिनिकल ट्रायल से यह पता लगता है कि कोई इलाज, दवा, मेडिकल प्रोसेस कितना प्रभावी है? इसका फायदा मेडिकल स्टूडेंट्स के साथ-साथ आम लोगों को भी होता है। डॉ. सेठ ने कहा कि मेडिकल कोर्सेज में रिसर्च को बढ़ावा देने के साथ-साथ अब पीएचडी कोर्सेज भी शुरू होंगे फिलहाल एनएमसी से जुड़े करीब 819 संस्थान है। एनएमसी चेयरमैन ने बताया कि 2025-26 में एमबीबीएस की सीटों में 11 हजार से ज्यादा का इजाफा हुआ है और सीटें बढ़कर 1.29 लाख हो गई है। मेडिकल कोर्सेज में ग्रैजुएशन और पोस्ट ग्रैजुएशन को मिलाकर 18 हजार सीटें बढ़ाई गई हैं और हर साल सीटों में इजाफा होता रहेगा। देश में अगले पांच वर्षों में 75000 मेडिकल सीटों के इजाफे का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल पीजी लेवल पर 65 से 70 हजार सीटें हैं और पीजी लेवल की सीटें बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।>>>Visit: Samadhanvani
मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट का एग्ज़ाम

देश में MBBS कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाले मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में 22 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स शामिल होते हैं। एनएमसी चेयरमैन का कहना है कि इस एग्जाम के लिए एक उचित टाइम कैलेंडर होना चाहिए। टाइम मैनेजमेंट एक बड़ा पहलू है और एट्रेस टेस्ट की प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। काउंसलिंग प्रक्रिया में देरी भी एक समस्या है। सकारात्मक माहौल बनाया जाएगाडॉ. सेठ ने कहा कि एनएमसी अधिनियम के तहत आयोग को एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए National Exit Test (NEXT) आयोजित करना होगा और इस टेस्ट को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जा रही है। इस टेस्ट को लागू करने से पहले सकारात्मक माहौल बनाया जाना जरूरी है ताकि छात्र बिना किसी तनाव के यह टेस्ट दे सके।



