
पुडुचेरी में फिर एनडीए केरलम में कांग्रेस की वापसी

Bengal कमल का कमाल, 15 साल का ममताराज समाप्त 20 मंत्री भी हारे भाजपा की आंधी में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी का किला तिनके की तरह बिखर गया। भाजपा ने 206 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया। बंगाल में सरकार न बना पाने की संघ-भाजपा के नेतृत्व की टीस भी खत्म हो गई। जनसंघ के संस्थापकों में शुमार और भाजपा के प्रेरणा-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के गृहराज्य Bengal में आखिर कमल खिल गया। 2011 के विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने वाली भाजपा ने अनथक संघर्ष के जरिये तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। तृणमूल महज 81 सीटों पर सिमट गई, जो पिछले चुनाव में भाजपा की 77 सीटों से सिर्फ चार अधिक है। भाजपा के सीएम पद के सबसे सशक्त उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से भवानीपुर सीट पर कांटे के मुकाबले में ममता खुद हार उनका आवास भी है।>>>Visit: Samadhanvan
तमिलनाडु : द्रविड़ द्वैत खत्म थलापति की विजय मगर बिना गठबंधन सरकार नहीं

Bengal के बाद सबसे बड़ी खबर तमिलनाडु से आई, जहां सुपरस्टार विजय चंद्रशेखर ने दो ध्रुवीय द्रविड़ियन राजनीति को जोरदार पटखनी दी है। मात्र दो साल पुरानी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) को उन्होंने सत्ता की दहलीज पर पहुंचा दिया।
234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके ने 107 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की।Bengal वह बहुमत से सिर्फ 11 सीटें दूर है। टीम लीडर यानी थलापति के रूप में प्रसिद्ध विजय की इस जीत ने राज्य में फिर से अभिनेताओं को सत्ता सौंपने की परंपरा जीवित कर दी। टीवीके के शानदार प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री एमके स्टालिन चुनाव हार गए। स्टालिन को कोलाथुर में टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से हराया। हालांकि स्टालिन के बेटे और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि जीत गए। सरकार के 15 मंत्री भी हार गए। अन्नाद्रमुक प्रमुख के पलानीस्वामी ने एडप्पाडी से 98,110 अंतर से बड़ी जीत हासिल की। टीवीके के बाद द्रमुक दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसने 60, जबकि अन्नाद्रमुक ने 47 सीटें जीती हैं।
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