
ईडी को नोटिस जारी न करने पर अपने ही रजिस्ट्री से Supreme कोर्ट नाराज

Supreme कोर्ट ने अपने ही रजिस्ट्री कार्यालय के रवैये को अनुचित करार देते हुए नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके अधिकारी खुद को ‘सुपर सीजेआई’ समझते हैं। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 37,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश धोखाधड़ी मामले में आरोपी आयुषी मित्तल उर्फ आयुषी अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। सीजेआई ने याचिका पर 23 मार्च को पारित एक आदेश का हवाला दिया और आश्चर्य जताया कि रजिस्ट्री अधिकारियों ने यह कैसे समझा कि पीठ ने याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी नहीं किया। सीजेआई ने कहा, रजिस्ट्री ने बिल्कुल अनुचित व्यवहार किया है। यह रवैया ठीक नहीं है। यहां बैठा हर व्यक्ति खुद को सुपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समझता है। पीठ ने कहा, ईडी निदेशक को कोई नोटिस जारी नही>>>Visit: Samadhanvan
फ्रीज खातों में फंसे हैं कई सौ करोड़ रुपये

Supreme कोर्ट ने याचिकाकर्ता आयुषी मित्तल, उनके पति और उनकी कंपनी पर बड़े पैमाने पर निवेश संबंधी धोखाधड़ी के आरोप हैं। बचाव पक्ष का दावा है कि निवेशकों को धनराशि का एक बड़ा हिस्सा लौटा दिया गया है, लेकिन फिलहाल ईडी की ओर से ‘फ्रीज’ किए गए बैंक खातों में कई सौ करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। पीठ ने 23 मार्च के अपने आदेश में मामले में पक्षकार राजस्थान सरकार के वकील द्वारा ईडी को कार्यवाही में पश्वकार बनाने के मौखिक अनुरोध को स्वीकार कर लिया था। इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना था कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार से संबंधित सभी चल और अचल संपत्ति को विधिवत कुर्क किया गया है या नहीं। पीठ ने दोहराया कि संपत्ति का विस्तृत विवरण प्रदान किए जाने तक वह जमानत याचिका के गुण-दोष पर विचार नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था अंचल संपत्तियों का ब्योरा अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को याचिकाकर्ता, उसके पति, उनके बच्चों, माता-पिता, भाई-बहनों और सास-ससुर की अचल संपत्ति का विस्तृत ब्योरा देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। अदालत ने कंपनी के निदेशकों, प्रबंधकों और प्रमुख कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण भी मांगा था। पीठ ने कहा था, जब तक संपूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, याचिका पर विचार नहीं करेंगे
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