चलती बस में नाबालिग का यौन उत्पीड़न निर्भया कांड जैसा’

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगातार सामने आ रही दुष्कर्म की घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस व प्रशासन की व्यवस्थागत विफलता करार दिया है। शीर्ष कोर्ट ने सोमवार को इन मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को कहा है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में लगातार हो रही यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा, हालिया घटनाएं राष्ट्रीय राजधानी में आम जनता, विशेषकर महिलाओं की बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित करने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों व प्रशासनिक अधिकारियों की गंभीर और व्यवस्थागत विफलता को दर्शाती हैं। पीठ ने दिल्ली के स्वरूप नगर में किशोरी के साथ हुई बर्बरता और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच 47 किलोमीटर तक चलती स्लीपर बस में नाबालिग से हुए यौन उत्पीड़न की घटना पर कहा, इन्हें देखकर 2012 के निर्भया कांड की यादें और उसकी पीड़ादायक समानताएं सामने आ जाती हैं। सामूहिक दुष्कर्म की घटना 4 अगस्त की है। ग्रेटर नोएडा से स्लीपर बस में सवार हुई किशोरी के साथ बस के चालक व परिचालक ने सामूहिक दुष्कर्म किया और उसे 40 किमी से अधिक दूर पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। दोनों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
महानगरों में महिलाओं से अपराध सबसे ज्यादा दिल्ली में राष्ट्रीय अपराध

दिल्ली में 2024 में महिलाओं से दुष्कर्म के 1058 जबकि नाबालिगों के साथ यौन हिंसा (पॉक्सो) के 1553 मामले दर्ज किए गए। शर्मनाक: दोनों ही मामलों की संख्या राष्ट्रीय राजधानी देश के सभी महानगरों के मुकाबले सबसे अधिक है। सार्वजनिक स्थलों को जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बनने दे सकते कोर्ट ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत भयमुक्त और गरिमापूर्ण जीवन हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। अंधेरे, खराब निगरानी और गश्त की कमी जैसी प्रशासनिक लापरवाही के कारण पार्क, सड़कों, बसों, मेट्रो स्टेशन, सबवे और फुटओवर ब्रिज को अत्यधिक जोखिम वाले इलाके नहीं बनने दे सकते।
