उत्तर भारत पहुंचा पश्चिमी विक्षोभ, पहाड़ों पर कहीं राहत

पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में सक्रिय होने के कारण जम्मू-कश्मीर से उत्तराखंड तक पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदान में भारी बारिश जारी है। इससे पारा 10 डिग्री तक गिरा है। केदारनाथ मार्ग में लगातार दूसरे दिन भूस्खलन के बाद यात्रा रोक दी गई है। चट्टान की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि रास्ते पर मलबा आने से 1,500 से अधिक श्रद्धालु फंस गए, जिन्हें मुश्किल से सुरक्षित निकाल कर गौरीकुंड पहुंचाया गया। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर हो गया है, लेकिन चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है। वहीं, एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके चलते ही सोमवार को उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, राजस्थान, बिहार और अंडमान-निकोबार में गरज के साथ बौछारें पड़ीं। वहीं, मराठवाड़ा, ओडिशा, पूर्वी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कैलाश, नाभीढांग, कुटी में दो से पांच फीट बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है इससे कुटी से आदि कैलाश को जोड़ने वाला यात्रा मार्ग बंद हो गया है। व्यास घाटी आदि कैलाश में पांच फीट तक बर्फ होने से जहां पर्यटक खुश हो गए। वहीं, फसलों को संभावित नुकसान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी।
नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति एक बार फिर विकराल हो गई

नेपाल में लगातार जारी बारिश के बीच बांगलुंग में नगर पालिका भवन ढहने का वीडियो सामने आया है। नदी के कटाव के कारण इमारत का एक हिस्सा धराशायी हो गया और देखते ही देखते इमारत नदी में समा गई। उधर, पानी बढ़ने से नारायणी नदी में बंधे एक क्रूज शिप की रस्सी टूट गई। शिप करीब 100 मीटर तक नदी के बहाव के साथ बहता चला गया और पुल के पिलर से टकरा गया। मनांग में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के बेस कैंप पर रविवार को हुए हिमस्खलन में मृतकों की संख्या चार हो गई है। सोमवार को दो और शव मिले। 8 लोग अब भी लापता हैं। लापता 22 लोगों में से 10 से संपर्क स्थापित कर लिया गया है। लगातार बर्फबारी, बारिश और खराब मौसम के चलते खोज एवं बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
