रुपये में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा नकदी

आरबीआई मुद्रास्फीति और विकास दर के आंकड़ों का आकलन
आरबीआई मुद्रास्फीति और विकास दर के आंकड़ों का आकलन

रुपये में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लंबी अवधि में किसी बड़ी उथल-पुथल की नीति समिति के फैसलों के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आशंका से इन्कार किया है। मौद्रिक बुधवार को कहा कि हालिया गिरावट के बावजूद रुपया अपनी उचित कीमत से नीचे है। उनके मुताबिक, ज्यादा नकदी से एनबीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) पर कोई खतरा नहीं है।आरबीआई गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय बैंक रुपये को उसकी उचित कीमत तक पहुंचने में मदद करेगा। साथ ही, केंद्रीय बैंक यह भी सुनिश्चित करेगा कि रुपये में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो। मल्होत्रा ने कहा कि बाजार शार्ट टर्म में रुपये को लेकर गलत तरीके से प्रतिक्रिया कर सकते हैं। किसी मुद्रा की सही कीमत लंबे समय में सामने आती है। बैंकों के पास इस समय जरूरत से काफी ज्यादा नकदी है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने वाली है। चालू वित्त वर्ष खत्म होने तक इस अतिरिक्त नकदी का बड़ा हिस्सा बैंकिंग व्यवस्था से निकल जाएगा। सितंबर की शुरुआत से बैंकों की व्यवस्था में औसतन करीब 7.3 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी रही है। यह बैंकों की कुल जमा का करीब 2.7 प्रतिशत है।

आरबीआई का नपी-तुली सख्ती वाला रुख, जानें इसके मायने

आरबीआई मुद्रास्फीति और विकास दर के आंकड़ों का आकलन
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गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के सामने मौजूद अधिक नकदी के जोखिम पर गवर्नर ने कहा आरबीआई इस बात की निगरानी कर रहा है कि एनबीएफसी में ज्यादा नकदी आने से उनके कर्ज की गुणवत्ता पर कोई बुरा असर न पड़े। देश में एनबीएफसी की वृद्धि मजबूत बनी हुई है। उन्हें बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज (बैंक क्रेडिट) में करीब 37 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। गवर्नर ने कहा, केंद्रीय बैंक एनबीएफसी से जुड़े जोखिम को लेकर हमेशा सतर्क रहता है, न केवल एसेट क्वालिटी के नजरिए से, बल्कि मांग और कीमतों के दबाव के लिहाज से भी।आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी अक्तूबर 2026 की समीक्षा में मौद्रिक रुख को तटस्थ (न्यूट्रल) से बदलकर नपी-तुली सख्ती (कैलिब्रेटेड टाइटनिंग) वाला कर दिया है। सरल शब्दों में कहें तो इसका मतलब है ब्याज दरों में कटौती की संभावना फिलहाल खत्म। यानी मौजूदा नीतिगत चक्र में दरों में कटौती पर विचार नहीं किया जा रहा है।

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