फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों की मार, हर तरफ बिखरे दिखे तबाही के निशान

महंगाई, बढ़ती असमानता और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ फ्रांस में शनिवार को हिंसक प्रदर्शन के बाद रविवार को तनावपूर्ण शांति रही। राजधानी पेरिस के अलावा मार्सेय, ल्योन, बोर्डो, रीम्स, स्ट्रासबुर्ग, ग्रेनोबल, नीस और लिमोज समेत कई शहरों में हर तरफ दुकानों, सार्वजनिक संपत्तियों, ऐतिहासिक स्थानों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के निशान साफ नजर आ रहे थे। लिमोन शहर 143 साल पुरानी सिटी हाल की ऐतिहासिक इमारत से रविवार को भी धुआं उठता देखा गया। अनुमान के मुताबिक देशभर में पांच लाख से अधिक लोगों के सड़कों पर उतरे। गृह मंत्री के अनुसार, 2000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और 600 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। पेरिस में एक प्रदर्शनकारी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।रायटर के अनुसार, लिमीज शहर के मेयर गिलाउम गेरां ने फ्रांस के लिमोज शहर में विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रदर्शनकारियों ने सिटी हाल में लगाई आग रायटर बताया कि ऐतिहासिक सिटी हाल की इमारत का ज्यादातर हिस्सा आगप्र से नष्ट हो गया। बोर्डों में नकाबपोश प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रीफेक्ट के आवास में घुस गए। शहर के मेयर तोमा काजेनाव के मुताबिक, 100 दुकानों में लूटपाट हुई।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार ने हिंसा के लिए अतिवामपंथी समूहों व आपराधिक

तत्वों को जिम्मेदार ठहराया है। प्रदर्शन स्कूलों की स्थिति और शिक्षकों की कमी से शुरू हुए थे, लेकिन बाद में महंगाई, सार्वजनिक खर्च में कटौती के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि वहां अक्सर क्रांति होती है और अमेरिका को भी इसमें शामिल होना चाहिए।अल्बानिया और बेल्जियम में भी हिंसा एएनआइ के अनुसार, अल्बानिया में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी के विरुद्ध छात्र नेतृत्व वाला आंदोलन लगातार छठे दिन हिंसक रहा। राजधानी तिराना में सरकारी इमारतों व अन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री ईडी रामा ने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी। बेल्जियम के ब्रुसेल्स व लीज में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़पें हुईं।
