चीनी की चिंता में बदली एथनाल खरीद की नीति

 

गन्ने के रस, चीनी सिरप और वी-हेवी शीरा से बना एथनाल नहीं खरीद सकेंगी सरकारी तेल कंपनियां
गन्ने के रस, चीनी सिरप और वी-हेवी शीरा से बना एथनाल नहीं खरीद सकेंगी सरकारी तेल कंपनियां

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण एवं घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने एथनाल खरीद नीति में बदलाव किया है। अब सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस, चीनी के सिरप एवं बी-हैवी शीरे से बने एथनाल की खरीद नहीं कर सकेंगी। सरकार का उद्देश्य गन्ने का ज्यादा हिस्सा चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कराना है। पिछले वर्ष 29 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथनाल बनाने में किया गया था। बीते एक महीने में चीनी के भाव में बहुत तेज वृद्धि हुई है। तेल विपणन कंपनियों ने दो दिन पहले 1,100 करोड़ लीटर एथनाल खरीदने की निविदा जारी की है, जिसमें गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथनाल खरीद के प्रस्ताव शामिल नहीं हैं। वहीं, मक्का, टूटा अनाज, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) से खरीदे जाने वाले अतिरिक्त चावल और सी-हैवी शीरे से बने एथनाल की खरीद का रास्ता खुला रखा गया है। सी-हैवी शीरा चीनी बनाने की प्रक्रिया में बचने वाला एक उप-उत्पाद है, जिसमें चीनी की मात्रा न्यूनतम होती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से चीनी उपलब्धता में कोई खास कमी नहीं आती है। जाहिर है कि सरकार एथनाल कार्यक्रम को रोकने के बजाय उसके लिए कच्चे माल के इस्तेमाल का संतुलन बदलना चाहती है।

 

अलनीनो के चलते महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे राज्यों में गन्ने की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई

गन्ने के रस, चीनी सिरप और वी-हेवी शीरा से बना एथनाल नहीं खरीद सकेंगी सरकारी तेल कंपनियां
गन्ने के रस, चीनी सिरप और वी-हेवी शीरा से बना एथनाल नहीं खरीद सकेंगी सरकारी तेल कंपनियां

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई न इलाकों में बाढ़ के साथ रोगों एवं कीटों के प्रकोप के चलते गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है। ऐसे में चीनी उत्पादन में गिरावट आने का खतरा है। देश में हर साल चीनी की खपत करीब 300 लाख टन है। इस वर्ष उत्पादन का अनुमान करीब 280 लाख टन है। इस अंतर को कम करने के लिए एहतियाती कदम जरूरी है चीनी मिलों की कमाई पर पड़ सकता है असर नीति में बदलाव का सीधा असर चीनी मिलों की कमाई पर भी पड़ सकता है। गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथनाल बनाने की व्यवस्था रखने वाली मिलों को अपने उत्पादन एवं बिक्री की योजना में बदलाव लाना पड़ सकता है। जाहिर है, सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। चीनी की कीमतों में तेजी रोकने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी है और साथ ही पेट्रोल में एथनाल मिलाने के कार्यक्रम के लिए जरूरी ईंधन भी उपलब्ध कराना है।तेल कंपनियों ने 1,100 करोड़ लीटर एथनाल खरीदने की निविदा जारी कीअलनीनो के चलते कई राज्यों में गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका

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