फैसलों पर चुनाव आयुक्तों में दरार,विपक्ष बोला-ज्ञानेश को को हटाएं

भाजपा ने खुलकर चुनाव आयोग का बचाव किया। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा, अलग विचार रखना लोकतंत्र की निशानी है। एसआईआर पर सभी की एक राय थी। तीनों चुनाव आयुक्त आपस में बातचीत नहीं करते, विचारों का आदान-प्रदान नहीं करते, सलाह नहीं करते और केवल एक-दूसरे से सहमत रहते तो विपक्षी दल कहते-ये मोदी समर्थक हैं। विपक्ष लगातार हार रहा है इसलिए संस्थाओं को निशाना बना रहा है। तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में कुछ मामलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की लिखित असहमति सामने आने के बाद आयोग ने बुधवार को सफाई दी कि मत भिन्नता, निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और पिछले एक साल में सभी फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। इनमें चार आपत्तियां एक ही दिन की हैं। ये आपत्तियां मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डाटाबेस पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ी हैं।
चंद टिप्पणियों को उजागर करना एकतरफा तस्वीर

संबंधित के अनुसार दोनों आयुक्तों ने लिखित रूप से कहा कि कई फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए। संधू ने यह भी लिखा, आयोग ने दो आयुक्तों की सलाह के खिलाफ अनधिकृ गई थी। सबसे गंभीर आपत्ति नए वोटरों के पंजीकरण वाले फार्म छह में माता-पिता, दादा-दादी का नाम पिछले एसआईआर में होने संबंधी बदलाव पर है। वहीं, ईसीआईनेट तक जिले के अफसरों की पहुंच सीमित करने पर भी आपत्ति जताई गई, जिसकी शिकायत कैबिनेट सचिव से भी की गई रिपोर्ट आने के बाद आयोग ने बयान जारी कर कहा, आयुक्तों के सुझाव चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए थे। आयोग का हर अधिकारी सुझाव दे सकता है। 10 महीनों की कुछ टिप्पणियों को उजागर कर आयोग की करीब 40 नई पहलों और देशभर में एसआईआर समेत बड़े फैसलों की अनदेखी करना एकतरफा तस्वीर है। आयोग ने जो भी फैसले लिए सब कानून के दायरे में थे।
