गरीबी घटाने में भारत की ऐतिहासिक छलांग

सब्सिडी का योगदान विश्व बैंक ने इसके पीछे तीन कारण 
सब्सिडी का योगदान विश्व बैंक ने इसके पीछे तीन कारण

दुनिया के सामने जब गरीबी, भुखमरी और. आर्थिक असमानता बड़ी चुनौती बनी हुई है, तब भारत ने इस मोर्चे पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत ने साबित किया है कि मजबूत आर्थिक विकास व जनकल्याणकारी योजनाओं के मेल से बड़े पैमाने पर गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ा जा सकता है। विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट ने भी भारत की इस प्रगति पर मुहर लगाई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में करीब 50 करोड़ लोग गरीबी से उबरे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस उपलब्धि को पीएम नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ के अनुसार, 2011-23 के बीच भारत में निम्न मध्यम आय वर्ग की गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी 57.7% से घटकर 16.1% रह गई। करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की आबादी भी 2011 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023 में महज 2.6 प्रतिशत रह गई है।

ग्रामीण भारत में तेजी से बदली तस्वीर

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खासकर महिलाओं की रोजगार में बढ़ती भागीदारी ने इस बदलाव को गति दी है। विश्व बैंक की गणना क्रय शक्ति समानता के आधार पर होती है। इसके तहत निम्न मध्यम आय वर्ग की गरीबी रेखा 4.20 डालर प्रतिदिन निर्धारित है, अत्यधिक गरीबी की रेखा तीन डालर प्रतिदिन है। आगे धीमी पड़ सकती है रफ्तार भारत में गरीबी आगे भी घटने का अनुमान है, लेकिन इसकी रफ्तार कुछ धीमी रह सकती है। अनुमान है कि 4.20 डालर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर 2028 तक घटकर 12.1 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, इनमें बदलाव संभव है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि गरीबी अब उन परिवारों में अधिक केंद्रित होती जा रही है, जहां शिक्षा का स्तर कम है, संपत्ति सीमित है और स्थायी रोजगार के अवसरों तक पहुंच नहीं है। आय की असमानता भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी कम हुई है, लेकिन ग्रामीण भारत में सुधार की गति अधिक रही। इसके बावजूद देश के अधिकांश गरीब अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जहां उत्पादकता कम और बेहतर गैर-कृषि रोजगार के अवसर सीमित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उम्र से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों के एक बड़े हिस्से में देश के कुल गरीबों की करीब 57 प्रतिशत आबादी रहती है। ऐसे में गरीबी घटाने के अगले चरण में इन क्षेत्रों में उत्पादक रोज़गार पैदा करना महत्वपूर्ण होगा।

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