हरियाणा में हैं अध्यापक, उत्तर प्रदेश में चल रही है डॉक्टरी

28 डॉक्टरों के नाम प्रदेश के अलग-अलग जिलों के आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में दर्ज
28 डॉक्टरों के नाम प्रदेश के अलग-अलग जिलों के आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में दर्ज

उत्तर प्रदेश में मरीजों का इलाज करने वाले कई आयुर्वेद डॉक्टर दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक के रूप में दर्ज थे। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई डॉक्टर संबंधित कॉलेजों में पढ़ाने के लिए पहुंचते ही नहीं थे। वहीं, कुछ डॉक्टर यूपी में ही एक स्थान पर मरीजों का इलाज कर रहे थे, जबकि उनकी नियुक्ति दूसरे जिले के आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में शिक्षक के तौर पर दिखाई गई थी। ऐसे 34 डॉक्टरों को चिह्नित कर एक साल के लिए डिबार कर दिया गया है। अब ये डॉक्टर नवंबर 2027 तक न तो किसी मेडिकल कॉलेज में अध्यापन कर सकेंगे और न ही मरीजों का इलाज कर पाएंगे। भारतीय चिकित्सा प्रणाली के राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) ने देशभर के आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों की जांच कराई थी। जांच में करीब 400 ऐसे शिक्षक मिले, जो कॉलेजों के रिकॉर्ड में कार्यरत थे, लेकिन मौके पर नहीं मिले। इनमें यूपी के 34 डॉक्टर शामिल हैं। इन सभी का पंजीयन उत्तर प्रदेश आयुर्वेदिक यूनानी तिब्बी बोर्ड में था। यानी ये यूपी में मरीजों का उपचार कर रहे थे, जबकि दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में भी इनके नाम शिक्षक के तौर पर दर्ज थे। चिह्नित डॉक्टरों में तीन हरियाणा, एक-एक राजस्थान, बिहार और हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत दर्शाए गए थे।

मेडिकल कॉलेजों से गायब मिले 34 आयुर्वेद डॉक्टरों पर एक साल के लिए प्रतिबंध

28 डॉक्टरों के नाम प्रदेश के अलग-अलग जिलों के आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में दर्ज
28 डॉक्टरों के नाम प्रदेश के अलग-अलग जिलों के आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में दर्ज

एनसीआईएसएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर यूपी बोर्ड ने सभी 34 डॉक्टरों का पंजीयन एक साल के लिए डिबार कर दिया है। बोर्ड ने संबंधित डॉक्टरों के गृह क्षेत्र के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारियों को भी पत्र कर निर्देश दिया है कि इन डॉक्टरों के प्रैक्टिस करने पर रोक लगाई जाए दूसरे राज्य में काम करने पर जरूरी है पंजीयन नियमों के मुताबिक किसी भी राज्य में मरीजों का उपचार करने के लिए वहां के संबंधित बोर्ड में पंजीयन कराना अनिवार्य है। यदि यूपी में पंजीकृत कोई डॉक्टर दूसरे राज्य के मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में कार्यरत होता है तो उसे वहां भी पंजीयन कराना पड़ता है। इसके लिए मूल राज्य का पंजीयन स्थानांतरित दूसरे राज्यों के कॉलेजों में दर्ज थे, लेकिन पंजीयन यूपी में ही था।

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