गोल्डन आवर में इलाज से बच जाती नाना की जानः डॉक्टर

नाना पाटेकर के निधन की वजह कार्डिएक अरेस्ट बताया जा रहा है। उनकी मौत को लेकर आ रही सूचना के आधार पर जीबी पंत हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ युसूफ जमान ने कहा कि उनको सीवियर अटैक आया था। इनके लक्षणों में बेचैनी और घबराहट है। उन्हें पसीने आ रहे होंगे, चेस्ट में दर्द भी हो रहा होगा, जिसे उन्होंने इग्नोनर कर दिया होगा। इसकी वजह से उनके हार्ट की ब्लॉकेज खत्म नहीं हुई और कार्डिएक अरेस्ट की वजह से मौत हो गई। अगर गोल्डन आवर यानी लक्षण आने के पहले दो घंटे में इलाज ले लिया होता, जरूरी दवाएं ले ली होतीं तो जान बच सकती थी और हार्ट को भी नुकसान नहीं होता।
दो घंटे में इलाज से न केवल जान बचती, हार्ट को भी नुकसान नहीं होताः डॉ जमाल

डॉक्टर जमाल ने कहा कि जिस प्रकार की सूचना आ रही है, उससे तो लग रहा है कि उन्हें मेजर हार्ट अटैक आ रहा था। अगर इस समय वो डॉ अगर अस्पताल पहुंच जाते तो उनकी जान भी बच जाती और इसका हार्ट पर भी असर नहीं होता। डॉक्टर ने कह कि इसलिए कभी भी इस तरह के लक्षण को इग्नोर नहीं करना चाहिए। अगर ये तीन दवा Tab clopidogrel 600 mg, tab ticagrelor 180 mg, tab prasugrel 60 mg ले लिया जाए तो इससे ब्लॉकेज खुल जाती है और जान बच सकती है। इसलिए अपने डॉक्टर की सलाह पर ये तीनों दवाएं अपने पास चले जरूर रखें। जहां तक सुबह हार्ट अटैक ज्यादा आने की बात है तो इस पर डॉक्टर जमाल ने कहा कि सुबह sympathetic nervous system ज्यादा एक्टिव होते है। इसकी वजह से हार्ट की नसों में तनाव आता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल के प्लाक टूटने लगते है। इसकी वजह से ब्लॉकज बनता है और हार्ट अटैक आता है। शुरुआती दो घंटे में इलाज से न केवल जान बचती, हार्ट को भी नुकसान नहीं होताः डॉ जमाल
