साइबर हमलों के नए दौर से ब्रिटेन और अमेरिका में चिंता की लहर

अमेरिका और ब्रिटेन नए तरह की साइबर सुरक्षा चिंता से जूझ रहे हैं। अमेरिका के बैंक जहां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) एजेंट्स से होने वाले लॉगिन को लेकर परेशान हैं, वहीं, ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने राज्य प्रायोजित साइबर और आतंकी हमलों को लेकर आपूर्ति व्यवस्था ठप होने की चेतावनी दी है।स्ट्रीटिंग ने कहा, साइबर हमलों, आतंकवाद और अन्य खतरों के कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ सकती है। ऐसे में लोग पानी की बोतलें, लंबे समय तक खराब न होने वाला सूखा भोजन, फर्स्ट एड किट, दवाएं व हैंड सैनिटाइजर घर में जुटा कर रखें। यह सारी तैयारी बुधवार को देश में पीएचपी साइटों पर साइबर हमले से लाखों वेबसाइटों और सरकार की सेवाओं के ठप होने के बाद की जा रही है। ओपन सोर्स कोड भाषा वाली पीएचपी साइटें पूरी दुनिया में इंटरनेट का बड़ा हिस्सा हैं।
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अमेरिका में बैंकिंग सुरक्षा को लेकर अमेरिका में गंभीर स्थिति बन रही है। स्वचालित एआई एजेंट्स अब बैंक के ग्राहकों की ओर से ओर से सीधे बैंक खातों में लॉगिन कर रहे हैं और बैंक यह पता नहीं लगा पा रहे हैं कि लॉगिन किसी इंसान ने किया है या मशीन ने। इन एजेंट्स को लॉगिन से जुड़े यूजरनेम व पासवर्ड ग्राहक खुद देते हैं इसलिए बैंक इन एजेंट्स को ग्राहक ही मानते हैं।एआई एजेंट्स से क्यों चिंतित हैं बैंक कुछ मामलों में इन एआई एजेंट्स को अपनी ओर से बैंकिंग फैसले लेते हुए देखा गया है। बैंकों के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि फैसला, ग्राहक ने लिया है. या मशीन ने। बैंकों का मानना है कि बिना किसी स्पष्ट पहचान के लॉगिन करने वाले ये एजेंट्स भविष्य में बड़ी वित्तीय और सुरक्षा संबंधी अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं। एआई एजेंट्स की संख्या अभी करीब 3 करोड़ है जो 2030 तक अरबों में पहुंच सकती है।
