तेल की आग फैक्टरी तक पहुंची, सितंबर में थोक महंगाई बढ़कर 11.39 फीसदी

कम ऊंची कीमत यानी निवेशक के मुनाफा नहीं कर पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा दबाव, खाद्य और ईंधन के साथ धातु, रसायन व कपड़े भी महंगे पश्चिम एशिया युद्ध और महंगे कच्चे तेल का असर अब और गहराता दिख रहा है। पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और फैक्टरियों में तैयार होने वाले सामान तक कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने के कारण सितंबर में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39 फीसदी हो गई। यह अगस्त के 9.92 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है। नई गणना श्रृंखला में यह सबसे ऊंचा स्तर है, जिसे जून 2026 में 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर शुरू किया गया था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, थोक मूल्य सूचकांक सितंबर में बढ़कर 112.5 हो गया, जो अगस्त में 110.8 था। महंगाई का दबाव अब केवल तेल और खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं रह गया है। धातु, रसायन, कपड़ा, रबर-प्लास्टिक और बिजली उपकरणों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इससे आने वाले महीनों में कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अभी जो महंगाई थोक बाजार में दिख रही है, वह जल्द ही खुदरा बाजार तक पहुंच सकती है। सितंबर में खुदरा महंगाई 5.54% दर्ज की गई है
2% थोक महंगाई अक्तूबर में होने का अनुमान

भारत रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत के मुताबिक, थोक महंगाई में तेजी का दायरा बढ़ रहा है। अगले साल तक कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। उन्होंने अक्तूबर 2026 में थोक महंगाई के 12% से ऊपर जाने का अनुमान जताया है। यह दर कम से कम फरवरी 2027 तक दोहरे अंक में रह सकती है। खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई दर अगस्त के 7.05% से बढ़कर सितंबर में 8.66% हो गई। इसमें प्राथमिक वस्तुओं के साथ विनिर्मित उत्पादों की श्रेणी में आने वाले खाद्य उत्पाद भी शामिल हैं।कमजोर मानसून ने खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। यदि कंपनियों बढ़ी लागत को लंबे समय तक वहन नहीं कर पाईं, तो बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इसका असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है।
