बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध के बीच भीड़ बढ़ी तो डीटीसी ने उतारीं सभी 6,858 बसें

मेट्रो के 40 ट्रेनें अधिक चलाने के बाद भी सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ा दबाव
मेट्रो के 40 ट्रेनें अधिक चलाने के बाद भी सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ा दबाव

दिल्ली में बीएस-4 और इससे पुराने वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर यात्रियों का दबाव बढ़ने लगा है। मेट्रो के साथ दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों में भी यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। यात्रियों को सुविधा देने और निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए डीटीसी ने अपने बेड़े की सभी 6,858 बसें सड़कों पर उतार दी हैं। दीपावली के मद्देनजर दिल्ली में खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, एनसीआर के अलावा हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी व्यापारी और खरीदार राजधानी आ रहे हैं। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ा है। इसका असर रोजाना दिल्ली आने वाले नौकरीपेशा लोगों और अन्य यात्रियों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में मेट्रो और बसों की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। व्यस्त मार्गों पर डीटीसी बसों में भीड़ बढ़ने से फेरे और आवृत्ति बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। दूसरी ओर, प्रदूषण के चलते ग्रेप 2 लागू होने के बाद एनसीआर से बीएस-4 और इससे पुराने वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक है। इससे सार्वजनिक परिवहन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

दो वर्षों में 42 लाख यात्रियों को सफर कराने का लक्ष्य

मेट्रो के 40 ट्रेनें अधिक चलाने के बाद भी सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ा दबाव
मेट्रो के 40 ट्रेनें अधिक चलाने के बाद भी सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ा दबाव

दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त फेरे शुरू किए हैं। इस तरह मेट्रो नेटवर्क पर कुल 40 अतिरिक्त ट्रेनें संचालित की जा रही हैं। डीटीसी भी यात्रियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर परिचालन बढ़ा रहा है। फिलहाल डीटीसी के बेड़े में 1,750 सीएनजी और 5,088 इलेक्ट्रिक बसों सहित कुल 6,858 बसें हैं। आमतौर पर निगम कार्यदिवसों में 90 से 95 प्रतिशत बसें ही सड़कों पर उतारता है और शेष बसें रिजर्व में रखी जाती हैं। हालांकि, यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अब पूरा बेड़ा संचालित किया जा रहा है।

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