धरना प्रदर्शन और आजीविका के अधिकार के बीच संतुलन

सीजेपी के आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी
सीजेपी के आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी

शीर्ष अदालत ने विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबारियों, खास तौर पर दिहाड़ी मजदूरों को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि विरोध करने के अधिकार और व्यापार करने व आजीविका कमाने के अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए, खासकर दिहाड़ी मजदूरों के मामले में। विरोध के लिए तय जगह एक निश्चित समय के लिए ही दी जानी चाहिए। पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब कारोबारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि ‘व्यापार में हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। ‘उन्होंने पीठ से प्रदर्शनों पर दो माह के लिए, खासकर त्योहारी सीजन में रोक लगाने की मांग की। इस पर सीजेआई ने कहा कि ‘यहां अलग-अलग दावे हैं। विरोध करने का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, ठीक वैसे ही जैसे व्यापार करने का अधिकार है। यहां व्यापार का मतलब सिर्फ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से नहीं है, बल्कि एक दिहाड़ी मजदूर की आजीविका के साधन से भी है। वह व्यक्ति अपनी रोजी-रोटी के लिए कहांजाए? इस दौरान कारोबारियों ने पीठ से कहा कि प्रदर्शन वाली जगह के आसपास के इलाकों में लगभग 50 लाख लोग रहते हैं। प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस की दुकानें बंद रहीं, जिससे कारोबारी गतिविधि नहीं हो पाई। इससे -त्योहारी सीजन में नुकसान बहुत बड़ा होता है। इससे लाखों कर्मचारी, सहायक कर्मचारी आदि प्रभावित होते हैं।

शीर्ष अदालत ने कारोबारियों मजदूरों के नुकसान पर चिंता जताई

सीजेपी के आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी
सीजेपी के आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी

जस्टिस बागची ने सवाल किया कि ‘क्या कारोबार में नुकसान के लिए सिर्फप्रदर्शनकारी जिम्मेदार है? जबकि सरकार भी सड़कों पर पाबंदियां लगाती है। उन्होंने कहा ‘क्या व्यापार में हुए नुकसान के लिए सिर्फ विरोध प्रदर्शनों को जिम्मेदार माना जा सकता है ? मेहता ने पीठ से कहा कि दुकानों को बंद करने के लिए मजबूर किया गया। ऐसी स्थितियां भी आती हैं जब प्रदर्शन हिंसक हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि आधिकारिक अनुमति के बिना विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया जा सकता। इसका नतीजा यह होता है कि दूसरों की रोजी-रोटी छिन जाती है पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 10 अक्तूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान किसी को भी गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया था। कोर्ट के समक्ष संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) सुरेंद्र कुमार द्वारा दायर हलफनामे में यह बात कही गई। इसमें कहा गया कि ममता बनर्जी और अन्य लोग धारा 163 के तहत दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करते पाए गए। इसलिए उन्हें स्टेशन ले जाया गया।

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