अमेरिकियों से 100 करोड़ की ठगी कॉल सेंटर से 11 जालसाज गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा में चल रहे एक अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर को पकड़ा है। यहां से दो महिलाओं समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य तकनीकी सहायता घोटाले के जरिये अमेरिकियों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपियों ने एफबीआई और अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों के नाम से फर्जी संदेश भेजकर पीड़ितों को डराया और ठगी को वास्तविक दिखाने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव त्यागी ने बताया कि एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी, इंस्पेक्टर डेटा राम, एसआई अतुल और नीरज यादव ने 21 सितंबर को पीतमपुरा गांव में किराये के एक परिसर की तीसरी और चौथी मंजिल पर चल रहे इस कॉल सेंटर पर छापा मारा और 11 लोगों को पकड़ा। कंप्यूटर तक पहुंच बनाकर की जाती थी ठगी: यह गिरोह पीड़ितों के कंप्यूटर में दूर से मैलवेयर डाल देते थे और दावा करते थे कि पीड़ितों के कंप्यूटर में वायरस आ गया है या उनसे छेड़छाड़ हुई है। सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करवाकर ठग उनके कंप्यूटर तक पहुंच बना लेते थे। बाद में उन्हें बताया जाता था कि उनके बैंक खाते ठग या बैंकिंग समस्या दूर करने के खाते भी खतरे में हैं। ठग पीड़ितों से तकनीकी या बैंकिंग समलए मजबूर करते थे।
भारत में केवल आंतरिक और सीमा-पार से होने वाले कुल डिजिटल साइबर फ्रॉड

छह साल में अमेरिकियों से हुई है 83 हजार करोड़ की ठगी अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के मुताबिक, केवल अमेरिकी नागरिकों (विशेषकर बुजुर्गों) ने भारत से संचालित होने वाले ‘टेक सपोर्ट’ और ‘ऑनलाइन फ्रॉड’ के कारण 2020 की शुरुआत से 2026 की शुरुआत तक लगभग 83,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम गंवाई है। अधिकार आयोग और भारतीय एजेंसियों के संयुक्त आंकड़ों के अनुसार, भारत में केवल आंतरिक और सीमा-पार से होने वाले कुल डिजिटल साइबर फ्रॉड के चलंते पिछले 6 वर्षों में भारतीयों ने भी लगभग 52,976 करोड़ रुपये गंवाए हैं।फर्जी कॉल सेंटर से बचने के उपाय अगर कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर डिवाइस हैक या वायरस का अलर्ट आए और कोई नंबर दिखे, तो उसपर कभी कॉल न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन या लैपटॉप में एनी डेस्क, टीम व्यूवर या रस्ट डेस्क जैसे एप डाउनलोड न करें। इससे ठग आपके बैंक अकाउंट का कंट्रोल ले लेते हैं। अगर कोई खुद को पुलिस, सीबीआई, या नामी कंपनी का अफसर बताकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे, तो तुरंत फोन काट दें।कोई भी प्रतिष्ठित कंपनी या बैंक आपसे फोन पर पासवर्ड, यूपीआई पिन, या ओटीपी नहीं मांगता। बैंक विवरण और ओटीपी न दें।
