वैश्विक स्तर पर चीनी के दाम आसमान पर

त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश की आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। वैश्विक बाजारों में चीनी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं, वहीं घरेलू स्तर पर मानसून की बेरुखी और सूखे के कारण उत्पादन घटने की आशंका ने हालात को और गंभीर बना दिया है। स्थिति को संभालने के लिए अब सरकार भी इथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन पर बैन लगाने पर विचार कर रही है।इंटरनेशनल कमोडिटी एक्सचेंज पर रॉ शुगर फ्यूचर्स में जोरदार उछाल आया है और यह 4 फीसदी से अधिक की तेजी के साथ 20.81 सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गया है, जो बीते 19 महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है। दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देश ब्राजील में लगातार बारिश के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। बोनस डेस्क वैश्विक बाजारों में चीनी के दाम बढ़ने और फ्यूचर्स में तेजी के बाद चीनी सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। मंगलवार को चीनी शेयरों में करीब 7 फीसदी तक उछाल दर्ज किया गया।
इथेनॉल डायवर्जन पर बैन की तैयारी

घरेलू मोर्चे पर उत्पादन घटने की आशंका : महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में इस साल चीनी का उत्पादन घटकर करीब 280 से 290 लाख टन रहने की उम्मीद है, जो कि देश की कुल खपत के करीब ही है। खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव 55.28 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी अधिक है।
