सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश

काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की प्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) के निर्णय में दखल देने से दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणियां करते हुए इन्कार ‘कर दिया। इसके बाद सीजेपी नेताओं ने याचिका वापस ले ली। हालांकि, न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद शाम तक एसईएम कोर्ट ने ‘दीनों को जमानत दे दी। दशहरा का अवकाश होने के बावजूद न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की। पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। अदालत के पूछने पर जब वकील ने बताया कि राकां की उम्र 32 वर्ष है तो कोर्ट ने कहा कि आप तो जेन जी हैं ही नहीं।
दास और रांका को माफीनामा व शर्तों के साथ मिली जमानत

सीजेपी के मकसद पर सवाल उठाते हुए अदालत ने कहा कि लोग वही रहते हैं, पर मकसद बदल जाता है। अचानक ‘रिजीम चेंज’ जैसी बातें सुनाई देती हैं, जो हम सामान्य तौर पर मतदान से करते हैं। ऐसे में ये सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि आप कौन हैं, आपका मकसद क्या है, आप क्या करने की कोशिश कर रहे हैं? याचिकाकर्ताओं के आचरण पर सवाल उठाते हुए पीठ ने कहा कि सौरव व आशुतोष विरोध-प्रदर्शन में सबसे आगे थे। उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिए। बैरिकेड किसी मकसद से लगाए जाते हैं और जब आप इन्हें तोड़ते हैं, तो 10-20 लोगों के वहां आ जाने की आशंका रहती है। इसमें ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जो आपके नियंत्रण में न हों और कुछ भी कर दें। हम देख रहे हैं कि हमारे देश के बाहर क्या हो रहा है। छात्रों का प्रदर्शन आगजनी और लूटपाट में बदल जा रहा है। शांतिपूर्ण बताकर शुरू किया गया आंदोलन हिंसक हो सकता है। पुलिस द्वारा प्रतिबंध लगाने का मकसद अवांछित लोगों को रोकना है। आप एसईएम कोर्ट में सुनवाई का इंतजार करें। उधर, शाम तक एसईएम कोर्ट से दोनों को जमानत मिल गई।
